मध्य प्रदेशराजनीति

सागर में बड़ा एक्शन: देवरी नगर पालिका अध्यक्ष नेहा जैन को पद से हटाया, भ्रष्टाचार के 3 आरोप साबित

भ्रष्टाचार में फंसी BJP नपा अध्यक्ष नेहा जैन, मध्यप्रदेश शासन ने तत्काल पद से हटाया

सागर (मध्यप्रदेश)। मध्य प्रदेश शासन ने सागर जिले की देवरी नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष और भाजपा नेता नेहा अलकेश जैन को पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई उन पर लगे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों की जांच के बाद की गई है। नेहा जैन वर्ष 2022 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर अध्यक्ष बनी थीं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी के ही पार्षदों ने गंभीर असंतोष जताया था।

आरोप और जांच का निष्कर्ष

शासन द्वारा जांच में कुल चार आरोप लगाए गए थे, जिनमें से तीन आरोप सत्य पाए गए। प्रमुख आरोप और उनकी पुष्टि इस प्रकार हैं:

  1. बिना अनुमति और अधिकार के भर्ती – नेहा जैन ने मस्टर पर 13 कर्मचारियों और 2 ऑपरेटरों की भर्ती अपने अनुमोदन से की, जो नियमों के विरुद्ध था।
  2. एसी खरीद में अनियमितताएं – नगर पालिका परिषद और रैन बसेरा समेत अन्य जगहों के लिए कुल 8 एसी की खरीद और भुगतान में लाखों रुपए की गड़बड़ियां पाई गईं।
  3. पारिषद को गलत तरीके से भंग करना – अध्यक्ष ने परिषद को भंग किया, क्योंकि इसमें शामिल पार्षद उनके विरोध में थे।

इन तीनों आरोपों के प्रमाणित होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल प्रभाव से उन्हें पद से हटा दिया

पार्षदों और विधायक की शिकायतें

नगर पालिका परिषद देवरी में कुल 15 पार्षद थे, जिनमें से 12 भाजपा के थे। बावजूद इसके पार्टी के 9 पार्षदों ने अध्यक्ष नेहा जैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया था।

देवरी से भाजपा विधायक बृजबिहारी पटेरिया भी अध्यक्ष की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट थे। उन्होंने पार्षदों के साथ पार्टी मुख्यालय जाकर यह मामला प्रदेशाध्यक्ष और नगर विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंचाया। इसके अलावा विधायक ने इसे विधानसभा में भी उठाया।

आदेश और कार्रवाई

मध्यप्रदेश शासन ने नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 41-A के तहत 25 अगस्त 2025 को भोपाल से आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया:

  • नेहा जैन अपने दायित्व का विधिसम्मत पालन करने में सक्षम नहीं रहीं।
  • नियमों के विरुद्ध कार्य करने के कारण उन्हें अध्यक्ष पद से तत्काल पदमुक्त किया गया

निष्कर्ष

देवरी में भाजपा की ही नेतृत्व वाली नगर परिषद में अध्यक्ष और पार्षदों के बीच बढ़ती खटास ने सरकार को कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।

 

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