मध्य प्रदेश

भवन निर्माण में तकनीकी गड़बड़ियां उजागर, विभाग की चुप्पी पर सवाल

शाहपुर के आदिवासी आश्रम भवन निर्माण में तकनीकी खामियों और झुकी बीमों को छिपाने के लिए मिट्टी भराई का कार्य तेजी से शुरू। विभाग की चुप्पी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल।

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर

शाहपुर –आदिवासी आश्रम भवन निर्माण में गड़बड़ियों की खबर का बड़ा असर हुआ है। खबर के बाद ठेकेदार ने अपनी तकनीकी कमियां और झुकी हुई बीमों को छुपाने के लिए मिट्टी भराई का कार्य तेजी से शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार निर्माण स्थल पर बीम और कॉलम का संतुलन बिगड़ा हुआ था, वहां अब मिट्टी भरकर लेवल बराबर किया जा रहा है, ताकि जांच के दौरान कोई खामी नजर न आए। जानकारों का कहना है कि मिट्टी का भराव फिलिंग निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा जरूर होता है, लेकिन यहां जल्दबाजी में की जा रही बैकफिलिंग का उद्देश्य तकनीकी खामी छिपाना है, न कि निर्माण को दुरुस्त करना।

जेसीबी से तेजी से कराया जा रहा कार्य

स्थानीय लोगों ने बताया कि ठेकेदार ने जेसीबी मशीन लगाकर पूरे बेस एरिया में मिट्टी डालने का काम दिन-रात शुरू कर दिया है।

मजदूरों को हटा दिया गया है और अब मशीनों से मिट्टी डालकर बीमों और दीवारों के बीच की जगहें भरी जा रही हैं। इस जल्दबाजी से साफ है कि ठेकेदार चाहता है कि जांच टीम के आने से पहले झुकी बीमों और गड़बड़ हिस्सों को मिट्टी से ढंक दिया जाए।

अवैध उत्खनन से लाई जा रही मिट्टी

ग्रामीणों का कहना है कि इस भराई के लिए मिट्टी पास के खेतों और सरकारी भूमि से अवैध उत्खनन कर लाई जा रही है। ट्रैक्टरों के माध्यम से बिना अनुमति रातों-रात मिट्टी ढोई जा रही है। यह कार्य न केवल खनिज नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण अधिनियमों की भी अवहेलना है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता बैकफिलिंग से बढ़ सकता है खतरा

निर्माण विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की अनकंट्रोल्ड बैकफिलिंग (बिना कम्पैक्शन की मिट्टी भराई) भवन की स्थायित्व और मजबूती पर गंभीर असर डालती है।
बिना जांच और दबाव परीक्षण के मिट्टी डालना भवन के सेटलमेंट का कारण बन सकता है, जिससे भविष्य में दीवारों में दरारें और झुकाव देखने को मिल सकते हैं।

विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों के बावजूद जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। पहले सूचना बोर्ड और एनआईटी का अभाव, फिर टेस्टिंग लैब का न होना, और अब कमी छिपाने के लिए मिट्टी डालने की जल्दबाजी यह सब विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

ग्रामीणों ने मांगी तत्काल जांच और कार्य पर रोक

क्षेत्र के ग्रामीणों व अभिभावकों ने इस पूरे मामले की तत्काल जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार द्वारा की जा रही यह जल्दबाजी स्पष्ट रूप से खामियां छुपाने की कोशिश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर विभाग ने कार्रवाई नहीं की, तो वे इस मामले को जिला कलेक्टर और लोकायुक्त तक ले जाएंगे।

 

 

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