गौमाता के सानिध्य में आयोजित अन्नकूट भंडारा महोत्सव, संत समाज ने दी गौसेवा को सर्वोच्च धर्म की संज्ञा
गाडरवारा में श्री देवराम जानकी खरिका मंदिर में अन्नकूट भंडारा महोत्सव संपन्न। संत समाज ने गौमाता की महिमा, गौसेवा और स्वदेशी भारत निर्माण का संदेश दिया।

गाडरवारा। श्री देवराम जानकी खरिका मंदिर परिसर में आयोजित अन्नकूट भंडारा महोत्सव के पूर्व मंदिर प्रांगण में संत समाज की गौ संगोष्ठी संपन्न हुई। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महामंडलेश्वर श्री सीताराम जी त्यागी ने कहा —
“गौमाता सकारात्मक ऊर्जा की खान हैं। गौमाता की परिक्रमा और स्पर्श से हमें यह ऊर्जा प्राप्त होती है। गोमूत्र औषधि नहीं, महाऔषधि है, और गौचरण रज अत्यंत पवित्र होती है। गौमाता के सानिध्य में स्वस्थ, समर्थ और स्वदेशीमय भारत का निर्माण ही हमारा अंतिम लक्ष्य है।”

महामंडलेश्वर ने आगे कहा कि जहां-जहां गौमाता सुखपूर्वक रहती हैं, वहां धर्म और लक्ष्मी का सदा वास होता है। उन्होंने मंदिर की गौशाला और उसके संचालक महंत बालक दास महाराज की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा गौशाला की स्थापना के 12 वर्ष पूर्ण होने पर संचालक मंडल को शुभकामनाएं दीं।
संतों का उद्बोधन और गौसेवा का संदेश
मृगेंद्रनाथ धाम से पधारे महंत रामचरण दास जी महाराज ने कहा कि गौकृपा सहज और सरल है क्योंकि वह हमारी माता हैं। गौकृपा से चिकित्सा व्यय में कमी लाई जा सकती है।

गौ संगोष्ठी को अर्जुन भारती जी महाराज, साध्वी पीतांबरा जी और पूर्णानंद महाराज ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन पंडित बसंत जोशी ने किया। इससे पहले सभी संतों ने मंदिर की गौशाला में गौमाता पूजन, दर्शन और परिक्रमा की।
अन्नकूट भंडारा और भजन संध्या
संध्या में मंदिर में महा आरती के पश्चात 56 भोग अन्नकूट भंडारा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में गौसेवक एवं नगरवासी शामिल हुए। देर रात तक संतों के भजन और भक्ति संध्या का क्रम चलता रहा, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा।








