गोवर्धन पूजा भगवान श्री कृष्ण की भक्ति का प्रतीक – आचार्य शिवम् दीक्षित

गाडरवारा । ओशो आश्रम के पास कुईया मोहल्ला पटेल वार्ड में चल रहे संगीतमय श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ ने कथा का श्रवण करने के लिए श्रद्धालुओं अपार जन समूह पहुंच रहा है ।
कथा के पांचवें दिवस कथा वाचक पं. श्री आचार्य शिवम् जी दीक्षित ने गोवर्धन पूजन का वर्णन करते हुए कहा कि गोवर्धन पूजा एक महत्वपूर्ण पर्व है जो प्रकृति की पूजा और भगवान श्री कृष्ण की भक्ति का प्रतीक है जिसमें गाय बैल और गोवर्धन पर्वत की विशेष पूजा की जाती है इससे व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और शांति आती है उन्होंने प्रवचन में आगे कहा कि जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएँ उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन को नीचे रखा और प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी।
तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा। गोवर्धन की आकृति बनाकर उनके मध्य में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति रखी जाती है नाभि के स्थान पर एक कटोरी जितना गड्ढा बना लिया जाता है और वहां एक कटोरी व मिट्टी का दीपक रखा जाता है फिर इसमें दूध, दही, गंगाजल, मधु और बतासे इत्यादि डालकर पूजा की जाती है और फिर इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। माता यशोदा अपने बाल कृष्ण को दिन में आठ पहर भोजन कराती थीं। जब सात दिन बाद इंद्र का क्रोध शांत हुआ, तो ब्रजवासियों और माता यशोदा को यह चिंता हुई कि कृष्ण सात दिनों तक भूखे रहे। इसलिए उन्होंने सातों दिन के आठों पहर के भोजन की भरपाई करने के लिए 56 तरह के व्यंजन बनाए और मुरलीधर को भोग लगाया। आरती कृष्ण मुरारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी भव्य आरती के समय कथा पंडाल गुंजायमान हो गया था । भागवत कथा श्रवण करने के लिए मातृशक्ति की भी भारी भीड़ देखी जा रही है । कथा में 56 भोग भी अर्पित किए गए । संगीतमय भजनों पर श्रद्धालुजन भक्ति भाव में विभोर होते दिखाई दे रहे है ।
कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चल रही है, और भक्त बड़ी संख्या में इस पावन अवसर का लाभ उठा रहे हैं । आरती के समय भी अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है आयोजन समिति ने कथा पंडाल में अच्छी व्यवस्थाएं की है । 30 अक्टूबर कथा की पूर्णाहुति और समापन होगा । आयोजन समिति ने धर्मप्रेमी जनता से निवेदन किया है कि वे इस पावन कथा में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करें।







