कमलेश मालवीय प्रजापति बोले इस बार पटाखों में होगी नई रौनक, नई चमक का धमाका! शहर तैयार है ऐतिहासिक पटाखों की जगमग दिवाली के स्वागत के लिए

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
सोहागपुर के बाजारों में दिवाली की रौनक चरम पर है। सड़कों पर बच्चों की खिलखिलाहट, दुकानों से आती रंगीन चमक और बारूद की हल्की खुशबू से पूरा शहर जगमगा रहा है। लेकिन इस रोशनी के पीछे जिन हाथों की मेहनत है, वे हैं शहर के पटाखा व्यापारी — वे लोग जो दूसरों की खुशी के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, खुद धूप-धूल में बैठे रहते हैं पर चाहते हैं कि हर घर में रौशनी हो।
इन दुकानों के बाहर छोटे-छोटे बोर्ड लटके हैं, कोई लिखता है “सुरक्षित पटाखे मिलेंगे”, तो कोई “फुलझड़ी से मुस्कान तक”। हर व्यापारी अपने स्टॉल को ऐसे सजाता है जैसे कोई अपनी बेटी की शादी में पंडाल सजा रहा हो। कोई फुलझड़ी दिखाता है, कोई अनार चलाकर बताता है कि “देखो भैया, यह आसमान में फूल खिला देता है।” बच्चों की आँखों में चमक और बड़ों के चेहरे पर पुरानी यादों का उजाला एक साथ झलकता है।
कमलेश मालवीय प्रजापति, जो समाजसेवा और सरलता के प्रतीक माने जाते हैं, इन पटाखा व्यापारियों की मेहनत देखकर मुस्कराते हैं। वे कहते हैं, “ये लोग शहर में सिर्फ पटाखे नहीं बेचते, ये शहर में खुशियाँ बाँटते हैं। जितनी मेहनत इनकी होती है, उतनी ही रौनक पूरे बाजार में दिखती है।” उनका कहना है कि इस बार बाजार में कई ऐसे विचित्र और ऐतिहासिक पटाखे आए हैं, जो पहले किसी ने नहीं देखे — नए डिजाइन, नए रंग और कम धुएँ वाले सुरक्षित पटाखे।
लाइसेंस की प्रक्रिया भले लंबी रही हो, मगर किसी व्यापारी ने हिम्मत नहीं हारी। सबका विश्वास एक ही है — “काम सरकार का है, पर त्योहार हमारा।” दुकानों में दिनभर ग्राहकों की आवाजाही लगी रहती है। कोई बच्चा जिद करता है, कोई माँ मोलभाव करती है, तो व्यापारी मुस्कराकर जवाब देता है, “बहनजी, ऊपरवाले ने भी दाम तय कर रखे हैं, पर आपकी खुशी के लिए फुलझड़ी तो फ्री दे दूँगा।” यही अपनापन इन बाजारों को जिंदा रखता है।
सेमरी, शोभापुर और सोहागपुर में इस बार करीब डेढ़ सौ से ज्यादा पटाखे की दुकानें लगी हैं। किसी की छोटी दुकान है, किसी का बड़ा ठेला, पर हर किसी का सपना एक जैसा है — दिवाली की रात जब आसमान रोशन हो, तो उस रोशनी में उनकी मेहनत की भी एक झिलमिल शामिल हो। बच्चे जब पटाखे जलाते हैं, तो उन दुकानदारों की आँखों में भी एक संतोष झलकता है — जैसे उन्होंने खुद आसमान में अपना सपना जला दिया हो।
कमलेश मालवीय प्रजापति बार-बार कहते हैं कि “सुरक्षा सबसे पहले है, खुशी सबसे प्यारी है।” उनकी अपील है कि सभी लोग सावधानी से पटाखे चलाएँ, बच्चों का ध्यान रखें और दिवाली को मुस्कान के साथ मनाएँ। वे यह भी मानते हैं कि त्योहार तभी खूबसूरत होता है जब उसमें संयम और सम्मान दोनों शामिल हों।
नुक्कड़ पर बैठे बुजुर्ग कहते हैं, “पटाखा वाला तो असली कलाकार है, जो अपने हाथों से दूसरों की खुशी बनाता है।” वाकई, ये व्यापारी सिर्फ पटाखे नहीं बेच रहे — ये उम्मीदें बेच रहे हैं, रिश्ते बाँट रहे हैं, और हर घर में खुशियों की एक लौ जला रहे हैं।
इस दिवाली जब आप बाजार जाएँ और किसी पटाखा व्यापारी से फुलझड़ी लें, तो उसके चेहरे की मुस्कान को ज़रूर देखना — उसमें नफा-नुकसान नहीं, बल्कि एक पूरी रात की मेहनत और पूरे शहर की रौशनी झिलमिला रही होगी।







