एनटीपीसी की वादा खिलाफी पर किसानों और मजदूरों का बड़ा ऐलान, 7 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन

गाडरवारा। एनटीपीसी गाडरवारा प्रबंधन की वादाखिलाफी और 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रभावित किसान और मजदूर अब सख्त रुख अपनाने को तैयार हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसानों और मजदूरों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए 7 अक्टूबर 2025 से अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण आंदोलन की घोषणा की।
ज्ञापन की प्रमुख बातें
किसानों और मजदूरों ने आरोप लगाया कि 2 सितंबर को दिए गए सामूहिक ज्ञापन में 11 सूत्रीय मांगें रखी गई थीं और 15 दिन में समाधान का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन 16 सितंबर तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मजबूरी में अब किसान और मजदूर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।
किसानों और मजदूरों की 11 सूत्रीय मांगें
- फिक्स वेतनमान व्यवस्था – सभी श्रमिकों को सीनियरिटी के आधार पर अपग्रेड और हर साल 10% वेतन वृद्धि।
- मेडिकल सुविधा – ईएसआईसी मेडिकल या हेल्थ इंश्योरेंस की व्यवस्था।
- रोजगार – रेलवे, पाइपलाइन व अन्य कार्यों से वंचित किसानों को तत्काल रोजगार।
- स्थानीय किसानों को प्राथमिकता – एनटीपीसी प्लांट और एजेंसियों में केवल प्रभावित किसानों के वाहन और संसाधन लगें।
- पेंशन योजना – 60 वर्ष पेंशन स्कीम को लागू रखा जाए और मृत किसानों के वारिसों को पीएपी कार्ड जारी हों।
- बिजली सब-स्टेशन और पुल निर्माण – मेहराखेड़ा-घाटपिपरिया नदी पुल और चिन्हित सब-स्टेशन का कार्य तुरंत शुरू हो।
- फ्लाई एश से प्रदूषण नियंत्रण – दूषित पानी और आर्सेनिक तत्व से बचाव की ठोस व्यवस्था।
- स्वास्थ्य सुविधाएं – अस्पताल में गंभीर बीमारियों का इलाज मुफ्त और प्रभावित परिवारों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्वास्थ्य सुविधा।
- शिक्षा सुविधा – बाल भारती पब्लिक स्कूल में किसानों के बच्चों को 75% फीस छूट और प्रवेश में प्राथमिकता।
- ग्राम विकास कार्य – खेल मैदान, सरकारी आईटीआई और ग्राम समितियों के माध्यम से विकास कार्य।
- लोकल वेंडरों को प्राथमिकता – हाउसकीपिंग और मैनपावर सप्लाई कार्य 100% स्थानीय समितियों को दिया जाए, वेंडरों को ₹1 करोड़ और समितियों को ₹2 करोड़ तक के कार्य दिए जाएं।
आंदोलन का तरीका
प्रभावित किसान और मजदूरों ने साफ किया है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से किया जाएगा। उद्देश्य सिर्फ एनटीपीसी प्रबंधन का ध्यान आकर्षित करना और लंबित मांगों का समाधान कराना है।
जिम्मेदारी किसकी?
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 अक्टूबर से पहले मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी एनटीपीसी प्रबंधन की होगी।
ज्ञापन की प्रतियां
ज्ञापन की प्रतियां सांसद, श्रम एवं पंचायत मंत्री, शिक्षा एवं परिवहन मंत्री को भी भेजी गई हैं। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इस दौरान मौजूद रहे और 2022 के समझौते की कॉपी भी संलग्न की गई।







