हरदा में पार्षदों की बगावत, सिराली नगर परिषद अध्यक्ष अनीता अग्रवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
सत्तारूढ़ बीजेपी के पार्षदों ने अपनी ही पार्टी की अध्यक्ष पर लगाए भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप; कलेक्टर को सौंपा अविश्वास प्रस्ताव

हरदा (मध्यप्रदेश):सिराली नगर परिषद में राजनीतिक भूचाल आ गया है। नगर परिषद अध्यक्ष अनीता अग्रवाल की कुर्सी अब खतरे में दिख रही है। सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षदों ने ही अपनी अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और भ्रष्टाचार व तानाशाही के आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव दायर किया है।
कलेक्टर को सौंपा गया प्रस्ताव
सोमवार को कुल 13 पार्षद (10 भाजपा और 3 कांग्रेस) संयुक्त रूप से हरदा कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर कलेक्टर पुरुषोत्तम कुमार के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।
नगर परिषद में कुल 15 पार्षद हैं — जिनमें 11 भाजपा, 3 कांग्रेस और 1 निर्दलीय सदस्य शामिल हैं।
इस दौरान कांग्रेस विधायक डॉ. आर.के. दोगने और कांग्रेस जिला प्रवक्ता आदित्य गर्ग भी मौजूद रहे। उन्होंने शीघ्र कार्रवाई की मांग की और कहा कि जनता के पैसे से चलने वाली परिषद में पारदर्शिता ज़रूरी है।
पार्षदों के गंभीर आरोप
वार्ड 13 के कांग्रेस पार्षद बहादुर सिंह राजपूत ने कहा —
“अध्यक्ष की तानाशाही और भ्रष्टाचार के कारण परिषद में विकास कार्य ठप हैं। ₹1.40 करोड़ के विकास फंड में भी गड़बड़ी हुई। इसलिए हम सब एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।”
वहीं, वार्ड 9 की भाजपा पार्षद पायल कुशवाहा ने कहा —
“अध्यक्ष द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है, इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के पार्षद मिलकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।”
प्रशासन की प्रतिक्रिया
कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने मीडिया को बताया —
“सिराली नगर परिषद के कुछ पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। नियमों के अनुसार एक-तिहाई सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। जांच के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी और आगे की कार्रवाई चुनाव आयोग के निर्देशानुसार होगी।”
भाजपा में मचा हड़कंप, अब निगाहें भोपाल पर
सिराली नगर परिषद में यह पहली बार है जब भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ भाजपा पार्षदों ने ही बगावत की है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह मामला अब भोपाल तक पहुंचेगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़ा करता है।
उधर, अध्यक्ष अनीता अग्रवाल ने नाराज पार्षदों को मनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक भाजपा पार्षद अब अपना रुख बदलने को तैयार नहीं दिख रहे।
राजनीतिक विश्लेषण
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बगावत स्थानीय स्तर पर गुटबाज़ी और असंतोष का संकेत है।
अगर अविश्वास प्रस्ताव पास होता है, तो भाजपा को नगर परिषद पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
निष्कर्ष
सिराली नगर परिषद की यह राजनीतिक जंग अब प्रदेश स्तर का मुद्दा बनती जा रही है। जनता को उम्मीद है कि इस विवाद के बीच विकास कार्य प्रभावित न हों और दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो।







