मर गई मां की ममता! रोड किनारे मिला नवजात का शव, मानवता हुई शर्मसार — अमरवाड़ा में दिल दहला देने वाली वारदात
अमरवाड़ा (छिंदवाड़ा) में इंसानियत को शर्मसार करने वाली वारदात, मां ने नवजात को सड़क किनारे फेंका, ठंड में तड़पकर बच्चे की मौत, पुलिस जांच में जुटी।

अमरवाड़ा (छिंदवाड़ा): मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा में इंसानियत को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है।
यहां एक ‘कलयुगी मां’ ने ममता की सारी सीमाएं लांघते हुए अपने नवजात शिशु को जन्म देने के तुरंत बाद सड़क किनारे फेंक दिया।
ठंड और उपेक्षा के कारण उस मासूम ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
यह हृदय विदारक दृश्य देखकर हर कोई दंग रह गया।
दिल दहला देने वाली वारदात
जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना अमरवाड़ा के पिपरिया राजगुरु गांव के समीप की है।
सुबह जब स्थानीय लोग सड़क से गुजर रहे थे, तो उन्होंने सड़क किनारे एक नवजात बच्चे का शव पड़ा देखा।
बच्चा पूरी तरह विकसित था और प्रतीत होता है कि उसे जन्म के कुछ ही घंटों बाद वहां छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
यह दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों के आंखों से आंसू छलक पड़े।
पुलिस जुटी ‘ममता की हत्यारी’ की तलाश में
सूचना मिलते ही अमरवाड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पुलिस ने अज्ञात महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार —
“आसपास के अस्पतालों और क्लीनिकों से हाल में हुए प्रसव की जानकारी ली जा रही है।
सीसीटीवी और स्थानीय मुखबिरों की मदद से आरोपी महिला का पता लगाया जा रहा है।”
पुलिस इस घटना को “मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध” मानते हुए जल्द कार्रवाई का भरोसा दे रही है।
संभावना — समाज या परिस्थिति की मजबूरी?
शुरुआती जांच में यह संदेह जताया जा रहा है कि किसी महिला ने लोक-लाज या अवैध संबंध के डर से नवजात को त्याग दिया।
हालांकि, पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।
यह सवाल अब समाज के सामने खड़ा है कि —
“क्या गरीबी या सामाजिक दबाव इतना बड़ा कारण हो सकता है कि एक मां अपनी कोख के अंश को मरने के लिए छोड़ दे?”
स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश और दुख का माहौल है।
लोगों ने इसे “मानवता पर कलंक” बताया है।
नागरिकों ने पुलिस से आरोपी महिला को कड़ी सजा देने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
समाज पर सवाल
यह वारदात सिर्फ एक नवजात की मौत नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता की एक काली तस्वीर है।
आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो अपने स्वार्थ या भय में इंसानियत को दफन कर देते हैं।
जरूरत है कि ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी बढ़ाई जाए।







