पराली पर सख्ती नहीं, समाधान चाहिए — नर्मदापुरम के किसानों ने कलेक्टर सोनिया मीणा से लगाई उम्मीदें
नर्मदापुरम के किसानों ने पराली जलाने पर सख्ती की बजाय समाधान की मांग उठाई। किसान नेता पुष्पराज पटेल बोले — “हम अपराधी नहीं, अन्नदाता हैं।” किसानों को कलेक्टर सोनिया मीणा से उम्मीदें।

संवाददाता राकेश पटेल इक्का
Narmadapuram News:
धान की कटाई के बाद खेतों में जब सुनहरी फसल इतिहास बन जाती है, तब किसानों के सामने पराली (फसल अवशेष) निपटाने की चुनौती खड़ी हो जाती है।
सरकार के आदेश हैं कि पराली जलाना अपराध है, लेकिन किसानों का कहना है — “बिना समाधान के आदेश कैसे मानें?”
किसानों की पीड़ा: सज़ा नहीं, समाधान की मांग

ग्राम्य इलाकों में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा यही है कि पराली जलाने पर सख्ती के बजाय व्यावहारिक समाधान की ज़रूरत है।
किसानों का कहना है कि अगली फसल की बुवाई तभी संभव है जब पराली निपटाने का सस्ता और असरदार तरीका उपलब्ध हो।
किसान नेता पुष्पराज पटेल ने कहा —
“हम अपराधी नहीं, अन्नदाता हैं। हमें सज़ा नहीं, रास्ता चाहिए। खेती आदेशों से नहीं, समाधान से चलती है।”
गलत पहचान पर भी उठे सवाल
किसानों ने यह भी कहा कि सैटेलाइट निगरानी में कई बार गलत पहचान (False Detection) के मामले सामने आते हैं।
“अगर किसी ने रंजिश में खेत में आग लगा दी या राहगीर ने सिगरेट फेंक दी — तो क्या यह साबित किया जा सकता है कि आग किसान ने ही लगाई?”
यह सवाल अब गांव-गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कलेक्टर सोनिया मीणा से जुड़ी उम्मीदें
नर्मदापुरम के किसानों की उम्मीदें अब कलेक्टर सुश्री सोनिया मीणा से जुड़ी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे संवेदनशील और समाधानमुखी अधिकारी हैं, जो किसानों की बात समझती हैं।
किसानों को भरोसा है कि इस बार प्रशासन केवल सख्ती नहीं, बल्कि व्यावहारिक रास्ता भी निकालेगा —
ताकि खेतों में आग नहीं, हरियाली दिखे।
समाधान की ओर कदम बढ़ाने का वक्त
किसानों की यह आवाज़ किसी विरोध की नहीं, बल्कि उम्मीद की पुकार है।
वे चाहते हैं कि सरकार, प्रशासन और वैज्ञानिक मिलकर ऐसा रास्ता तैयार करें,
जहां पराली न समस्या बने, न अपराध।
क्योंकि पराली से उठता धुआँ सिर्फ कार्बन नहीं,
बल्कि किसानों की मजबूरी और व्यथा भी साथ लिए होता है —
और इस मजबूरी को समझना ही असली समाधान की शुरुआत होगी।







