मध्य प्रदेश

तीन दिन बाद भी विभाग मौन, ठेकेदार की मनमानी जारी, अवैध मिट्टी उत्खनन से भराई का काम तेज

275 लाख के आदिवासी आश्रम भवन निर्माण में नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां, इंजीनियर और एसडीओ तक नहीं पहुंचे स्थल पर

संवाददाता शैलेंद्र गुप्ता शाहपुर

शाहपुर। आदिवासी बालक आश्रम धार भवन निर्माण में उजागर हुई गड़बड़ियों के बावजूद जनजातीय कार्य विभाग तीन दिन बीत जाने पर भी खामोश है। लगभग ₹275.43 लाख की लागत से हो रहे इस भवन में अनियमितताएं लगातार सामने आने के बावजूद विभागीय इंजीनियर और एसडीओ ने अब तक मौका निरीक्षण तक नहीं किया।
वहीं, ठेकेदार द्वारा मिट्टी भराई और अवैध उत्खनन का कार्य बिना किसी रोक-टोक के दिन-रात जारी है।

झुकी बीमों को छिपाने की जल्दबाजी, मशीनों से हो रहा मिट्टी भराव

स्थानीय लोगों के अनुसार भवन की कई बीमें और कॉलम झुक चुके हैं, जिन्हें छिपाने के लिए ठेकेदार ने जेसीबी मशीन लगाकर मिट्टी भराई का कार्य तेज कर दिया है।
मजदूरों को हटा दिया गया है, अब केवल मशीनों से बेस एरिया में मिट्टी भरकर खामियों को छुपाने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि मिट्टी भराई बैकफिलिंग सामान्य निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा जरूर होती है, लेकिन यहां जल्दबाजी में की जा रही भराई का उद्देश्य तकनीकी खामी छिपाना है, न कि निर्माण को दुरुस्त करना।

अवैध उत्खनन से लाई जा रही मिट्टी

ग्रामीणों ने बताया कि इस भराई के लिए पास के खेतों और सरकारी भूमि से अवैध रूप से मिट्टी निकाली जा रही है। रात के समय ट्रैक्टरों के माध्यम से बिना अनुमति मिट्टी ढोई जा रही है, जिससे खेतों में गहरे गड्ढे बन गए हैं। यह कार्य न केवल खनिज नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरणीय कानूनों की भी अवहेलना है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी जानबूझकर आंख मूंदे बैठे हैं, जिससे ठेकेदार को खुली छूट मिल गई है।

इंजीनियर और एसडीओ की भूमिका संदिग्ध

जानकारों का कहना है कि तीन दिन पहले अनियमितताओं की खबर प्रकाशित होने के बाद जनजातीय कार्य विभाग के इंजीनियर और एसडीओ को मौके पर पहुंचकर जांच करनी चाहिए थी, लेकिन अब तक न कोई निरीक्षण हुआ, न रिपोर्ट तैयार की गई। विभाग की यह चुप्पी सवाल खड़े कर रही है कि क्या अधिकारी जानबूझकर ठेकेदार को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

टेस्टिंग मशीन, सूचना बोर्ड और NIT का अभाव बरकरार

मामले की जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि निर्माण स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगाया गया है, न NIT और एस्टीमेट की जानकारी उपलब्ध है। निर्माण कार्य में प्रयोग हो रहे सीमेंट, रॉड और अन्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने के लिए टेस्टिंग मशीन भी मौजूद नहीं है। इससे आशंका बढ़ गई है कि घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता ,भवन की गुणवत्ता पर संकट

निर्माण विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कम्पैक्शन और जांच के की गई मिट्टी भराई से भवन की स्थायित्व और मजबूती पर गंभीर असर पड़ता है। भविष्य में भवन के सेटलमेंट और दीवारों में दरारें पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण की गुणवत्ता जांचे बिना कार्य जारी रखना पूरा प्रोजेक्ट जोखिम में डालने जैसा है।

ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग,
आसपास के ग्रामीणों ने विभाग की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है।
उन्होंने मांग की है कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल जांच कर निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्टर कार्यालय और लोकायुक्त तक शिकायत दर्ज कराएंगे।

ग्रामीण रघुनाथ उइके ने बताया तीन दिन से अधिकारी नहीं पहुंचे। ठेकेदार खुलकर मनमानी कर रहा है। खेतों से मिट्टी चोरी हो रही है। विभागीय संरक्षण के ही कारण ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहा है
विभागीय लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी से करोड़ों रुपये का सरकारी प्रोजेक्ट गुणवत्ता संकट में है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी कब जागते हैं और कार्रवाई की दिशा तय करते हैं।

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