गाडरवारा सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी
100 बेड के अस्पताल में सिर्फ 5 डॉक्टर, मरीज बेहाल; वायरल फीवर से हालात बिगड़े

गाडरवारा (नरसिंहपुर)।
शहर का शासकीय सिविल अस्पताल, जो पूरे क्षेत्र के हजारों मरीजों के लिए जीवनरेखा माना जाता है, इन दिनों बदहाल स्थिति से जूझ रहा है। 100 बिस्तरों की क्षमता वाले इस अस्पताल में 11 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल सिर्फ 5 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी के चलते मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
बदलते मौसम में वायरल फीवर का कहर
लगातार बारिश और उमस भरे मौसम के कारण वायरल फीवर और मौसमी बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। हर दिन बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों में वायरल बुखार के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। लंबी-लंबी कतारों में खड़े मरीजों की हालत देखने लायक होती है।
ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सिर्फ 5 डॉक्टर
मौजूदा 5 डॉक्टरों में 3 पुरुष और 2 महिला मेडिकल ऑफिसर हैं, जिन्हें ओपीडी, इमरजेंसी, डिलीवरी वार्ड और अन्य विभागों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है। रिक्त 6 पद लंबे समय से भरे नहीं गए हैं, जिससे मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा। कई गंभीर मरीज मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं।
लैब और स्टाफ भी अधूरा
अस्पताल में सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि खून जांच लैब और अन्य तकनीकी स्टाफ की भी भारी कमी है। इसके चलते जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिल पाती और इलाज में देरी होती है। मौजूदा कर्मचारियों को ओवरटाइम काम करना पड़ रहा है।
जनता में आक्रोश, स्वास्थ्य विभाग पर सवाल
स्थानीय लोगों ने अस्पताल की लचर व्यवस्था पर कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है कि गाडरवारा और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए यही एकमात्र बड़ा सरकारी अस्पताल है। ऐसे में यहां डॉक्टरों और स्टाफ की कमी स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है।
लोगों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जाए और सुविधाओं में सुधार हो, ताकि आम जनता को बेहतर और समय पर इलाज मिल सके।






